अपनी बात कह कर रुद्र उस तरफ बढ़ने लगा! वही रुद्र की बात सुन कर रियांशी की भी आंखे बड़ी हो गई! वह रुद्र से गुस्सा है! नाराज है लेकिन नफरत नहीं करती क्योंकि कही न कही वह भी ये जानती है कि जो हुआ रुद्र की उसमें कोई भी गलती नहीं थी! उसे ये समझ नहीं आ रहा था कि वह रुद्र को उस तरफ जाने से कैसे रोके जहां पृथ्वी हैं! पृथ्वी को कोई भी डर नहीं था! वह बस अपने बबल के कहने पर छुपा हुआ था! वरना जो उन दोनों के बीच कल रात को हुआ था! उसके बाद वह कोई भी मौका नहीं छोड़ने वाला था अपने दोनों सालों को चिढ़ाने का! पर उसे ये मौका नहीं चाहिए था क्योंकि उसकी बबल को वह किसी के सामने भी शर्मिंदगी महसूस नहीं कराना चाहता था!
रुद्र के कदम उस तरफ ही बढ़ रहे थे! जहां पृथ्वी था! पृथ्वी ने अपनी आंखें कस कर बंद कर रखी थी! क्योंकि भागने का कोई रास्ता भी नहीं था!









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