सुबह हो चुकी थी। सूरज की किरणे सभी जगह अपनी रोशनी बिखेर रही थी। गर्मियों का दिन था गर्मी बड़ी हुई थी राजस्थान में रात जितनी ठंडी दिन में उतनी ही गर्मी। महादेव ने भी अच्छा बैलेंस बना रखा था। दिन भर धूप में मजदूरी करने के बाद एक सुकून की नींद के लिए ठंडी रात खैर ये मजदूरी तो गरीबों के नसीब मे होती है। ऐसा नहीं है कि आप गरीब है तो सिर्फ आप ही मजदूरी करोगे पढ़ें लिखे लोग भी करते हुआ बस फर्क इतना होता हुआ कि वह मजदूरी बड़े दफ्तर में ac या पंखे के नीचे करते है।कुछ पढ़े लिखे लोग जिन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है वह लोग हर दिन खुद को मार कर मजदूरी करते है कड़ी धूप में यही है हमारे भारत देश की सच्चाई जहां अमीर और अमीर होता जा रहा है एंड गरीब और गरीब मीडिया भी इस बात को कवर नहीं करती उन्हें तो बस अपनी चैनल की trp की पड़ी रहती है कि कैसे उनकी trp आएगी जिस कारण वह सभी असली मुद्दे से भटक चुके है। कोई भी असली चीज दिखाना ही नहीं चाहता है भ्रष्टाचार इतना बढ़ चुका है आम इंसान को अपना जीना दुश्वार लगने लगा है।








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