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कॉन्ट्रसेप्टिव पिल्स, हिडेन कैमरा

इतना कह कर आरुषि अनिरुद्ध को ढूंढने चली गई। अनिरुद्ध का चेहरा इस वक्त काला पड़ चुका था। वह बस दीवार पर लगी हर एक पेंटिंग को घूरते हुए जा रहा था। उसका दिमाग क्यों खराब था ये बात उसे भी नहीं पता थी पर उस लड़के का आरुषि को डार्लिंग कहना बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था।

अनिरुद्ध जा ही रहा था कि उसकी नजर एक पेंटिंग को देख रहे सख्श की तरफ गई। उस सख्श की पीठ अनिरुद्ध की तरफ थी लेकिन उसकी कद काठी ही काफी थी अनिरुद्ध को ये समझाने के लिए वह है कौन?

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