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सालों का इंतजार पूरा हुआ अनिरुद्ध आरुषि

सड़क पर एक काली गाड़ी बहुत ही तेजी से दौड़ रही थी उस गाड़ी को अनिरुद्ध ड्राइव कर रहा था। अनिरुद्ध के बगल में आरुषि बैठी हुई थी वह दोनों ही इस वक्त आर्ट एग्जिबिशन जा रहे थे जा सिर्फ अनिरुद्ध रहा था पर आरुषि भी उसके पीछे आ गई ये कह कर कि उसे 3उसके दोस्त से मिलना है जो वही उससे मिलने आएगा। आरुषि दीवानी की तरह अनिरुद्ध को दीवानों की तरह ताड़े जा रही थी।

अनिरुद्ध की ड्राइविंग जितनी स्मूथ थी, आरुषि के दिल की धड़कनें उतनी ही ऊबड़-खाबड़ हो रही थीं। वह अपनी सीट पर थोड़ा तिरछी होकर बैठ गई ताकि अनिरुद्ध का प्रोफाइल व्यू साफ़ देख सके। उसके दिमाग में खयालों का एक अलग ही 'आर्ट एग्जिबिशन' चल रहा था।

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