
रियांशी और आरुषि जैसे ही अंदर आईं, लिविंग रूम का माहौल किसी सीरियस बिज़नेस मीटिंग जैसा था। अनिरुद्ध रायसिंघानिया सोफे पर बैठा एक फाइल पढ़ रहा था। डार्क ग्रे शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए और आँखों पर चश्मा वह जितना गंभीर था, उतना ही हैंडसम भी।
आरुषि की धड़कनें उसे देखते ही 'सुपरफास्ट एक्सप्रेस' बन गईं। उसने जल्दी से अपने बाल ठीक किए और अपना टॉप सीधा किया।
"हिटलर? ओप्स... आई मीन, भाई! आप घर पर हैं?" रियांशी ने टोका।
अनिरुद्ध ने सिर उठाया। उसकी गहरी और तीखी नज़रें सीधा आरुषि पर पड़ीं। आरुषि ने तुरंत अपनी नज़रें नीची कर लीं। उसे समझ नहीं आता था कि जब भी अनिरुद्ध सामने होती है, उसकी सारी 'बोल्डनेस' कहाँ गायब हो जाती है।
"कॉलेज में आज काफी ड्रामा हुआ है, रियांशी," अनिरुद्ध की आवाज़ गहरी और भारी थी। उसने आईपैड टेबल पर रखा।
"ये पृथ्वी राजपूत के साथ रेस करना, और फिर बीच सड़क पर तमाशा क्या ये सब जरूरी था?" अनिरुद्ध ने कड़क आवाज में पूछा
रियांशी ने सोफे पर धंसते हुए कहा, "उसने शुरुआत की थी, मैंने बस खत्म किया।"
अनिरुद्ध की नज़र अब आरुषि पर टिकी थी आगे कहा,"और तुम, आरुषि? तुम तो समझदार हो। तुमने इसे रोका क्यों नहीं?"
आरुषि का गला सूख गया। उसने हकलाते हुए कहा, "व... वो... अनिरुद्ध जी, मैंने कोशिश की थी, पर रिया सुनती कहाँ है।"
अनिरुद्ध खड़ा हुआ और आरुषि की तरफ बढ़ा। आरुषि के दिल का बुरा हाल था। जब अनिरुद्ध उसके करीब आकर खड़ा हुआ, तो उसे उसकी कड़क परफ्यूम की खुशबू आने लगी।
"तुम्हारी ज़िम्मेदारी है कि ये किसी मुसीबत में न फँसे। समझी तुम?" अनिरुद्ध ने आरुषि की आँखों में झाँकते हुए कहा।
आरुषि बस सिर हिला पाई। उसकी बोलती पूरी तरह बंद हो चुकी थी। अनिरुद्ध की आवाज़ में जो 'अथॉरिटी' थी, वह आरुषि को डराने के साथ-साथ उसकी तरफ और खींच रही थी।
"जाओ, ऊपर जाकर फ्रेश हो जाओ। डिनर टेबल पर मिलते हैं," अनिरुद्ध ने कहा और रियांशी की तरफ मुड़ा।
आरुषि सीढ़ियों की तरफ लगभग भागती हुई गई। रियांशी ने पीछे से आवाज़ दी, "आरुषि, संभल के! गिर मत जाना अपने ख्यालों में
रियांशी का कमरा,
आरुषि बिस्तर पर औंधे मुँह गिरी हुई थी और तकिये में मुँह छिपाकर चिल्ला रही थी। रियांशी अंदर आई और हँसते हुए उसके पास बैठी और कहा
"बस कर पागल! भाई ने सिर्फ डाँटा है, गोली नहीं मारी," रियांशी ने मज़ाक उड़ाया।
आरुषि ने अपना लाल चेहरा ऊपर किया, "रिया! तूने देखा वो मुझे कैसे देख रहे थे? उनकी आँखों में कितनी इंटेंसिटी थी! यार, वो जब 'आरुषि' बोलते हैं ना, तो मेरे पेट में तितलियाँ नहीं, डायनासोर उड़ने लगते हैं।" इतना कह कर आयुषी जोरो की ब्लश करने लगी
रियांशी ने अपनी आँखें घुमाईं और कहा,, "वो तुझे डाँट रहे थे, और तू रोमांस ढूँढ रही है? और वैसे भी, वो तुझे अपनी छोटी बहन जैसा समझते हैं, ये बात तुझे कब समझ आएगी?"
"खबरदार जो 'भाई' बोला!" आरुषि तकिया उठाकर रियांशी को मारने लगी। "वो मेरे लिए 'भाई' नहीं हैं। वो मेरे 'फ्यूचर हसबैंड' हैं। बस उन्हें अभी इस बात का अंदाज़ा नहीं है। वो थोड़ा 'स्लो लर्नर' हैं इमोशंस में।"
रियांशी हँसने लगी और उसी तरह कहा,"स्लो नहीं, वो 'नो लर्नर' हैं। उनके दिमाग में सिर्फ स्टॉक्स, डील और फाइल्स चलती हैं। और अब तो उनकी लिस्ट में पृथ्वी राजपूत का नाम भी जुड़ गया है।"
आरुषि का चेहरा फिर से गंभीर हो गया और उसने रियांशी से कहा,"रिया, मज़ाक अपनी जगह है, पर अनिरुद्ध सही कह रहे थे। पृथ्वी की आँखें... वो डरावनी हैं। वो जब तुझे देख रहा था ना, तो ऐसा लग रहा था जैसे वो तुझे अपनी जागीर समझता हो। तू संभल के रहना।"
रियांशी की मुस्कान गायब हो गई। उसने खिड़की के बाहर देखा जहाँ अंधेरा गहरा रहा था रियांशी ने गहरे अंधेरे को देखते हुए कहा,"पृथ्वी राजपूत ने अभी RR का असली चेहरा नहीं देखा है, आरुषि। उसे लगता है वो बीस्ट है... पर उसे नहीं पता कि शिकार करना मैंने उससे बेहतर सीखा है।”
डाइनिंग टेबल पर सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ चम्मचों के प्लेट से टकराने की आवाज़ आ रही थी। अनिरुद्ध टेबल के हेड पर बैठा था, चेहरे पर वही 'नो-नॉनसेन्स' एक्सप्रेशन। रियांशी बड़े आराम से अपना पास्ता खा रही थी, लेकिन आरुषि की हालत खराब थी। वह अपनी प्लेट में रखे सलाद को ऐसे घूर रही थी जैसे उसमें से कोई बम निकलने वाला हो।
"आरुषि, सलाद को घूरने से वो अपने आप पेट में नहीं जाएगा। खाना शुरू करो," अनिरुद्ध की भारी आवाज़ ने शांति को तोड़ा।
आरुषि हड़बड़ा गई, "जी... जी अनिरुद्ध जी, बस... बस शुरू ही कर रही थी।" उसने झटके से एक बड़ा सा ककड़ी का टुकड़ा मुँह में डाल लिया और अब उसे चबाने में उसे दिक्कत हो रही थी।
रियांशी ने यह देखा और अपनी हंसी दबाते हुए कहा, "भाई, आप इतना सीरियस क्यों हैं? डाइनिंग टेबल है, कोर्ट रूम नहीं। और वैसे भी, आज की रेस के बारे में आप जितना सोच रहे हैं, बात उतनी बड़ी नहीं है।"
अनिरुद्ध ने अपना नैपकिन साइड में रखा और रियांशी की आँखों में देखते हुए बोला, "बात रेस की नहीं है रिया, बात उस 'राजपूत' की है। मुझे उसकी वाइब्स पसंद नहीं हैं। जितना उसके बारे में जो सुना है, वह उसे एक सनकी (maniac) साबित करता है। तुम उससे जितनी दूरी बनाकर रखोगी, उतना अच्छा होगा।"
रियांशी ने कंधे उचकाए, "ही इज जस्ट एन एरोगेंट ब्रैट, भाई। कॉलेज खत्म होते ही उसका और मेरा रास्ता अलग होगा। फिलहाल, वह सिर्फ मेरा एक कंपटीटर है।"
आरुषि ने अपना मुँह खाली किया और धीरे से बोली, "पर वो बहुत अजीब हरकतें करता है। आज उसने रिया का कॉफी मग उठा लिया और..."
"और क्या?" अनिरुद्ध की आवाज़ अचानक ठंडी हो गई। उसकी प्रोटेक्टिव भाई वाली साइड जाग चुकी थी।
रियांशी ने आरुषि को टेबल के नीचे ज़ोर से लात मारी।
आरुषि के मुँह से 'आह' निकली।
"कुछ नहीं भाई! आरुषि कह रही थी कि वो बहुत बदतमीज है, बस। कॉलेज के लड़के हैं, अटेंशन पाने के लिए कुछ भी करते हैं," रियांशी ने बात संभाली।
अनिरुद्ध ने एक गहरी सांस ली और आरुषि की तरफ मुड़ा, और कहा,"आरुषि, अगर वो या उसका कोई भी दोस्त तुम दोनों को परेशान करे, तो मुझे तुरंत बताना। डरने की ज़रूरत नहीं है।"
अनिरुद्ध की 'प्रोटेक्टिव केयर' देखकर आरुषि के दिल में फिर से गिटार बजने लगे। उसने मन ही मन सोचा, 'हे भगवान! ये आदमी इतना हॉट और केयरिंग एक साथ कैसे हो सकता है? कोई मुझे बचाओ!'
"जी... मैं... मैं आपको ही बताऊँगी सबसे पहले," आरुषि ने ब्लश करते हुए कहा।
पृथ्वी का अपार्टमेंट,
यहाँ की खामोशी डरावनी थी। पूरे कमरे में सिर्फ एक लाल रंग की लैंप जल रही थी, जो दीवारों पर नाचती हुई परछाइयों को और भी खौफनाक बना रही थी। फर्श पर कांच के कुछ टुकड़े बिखरे हुए थे और हवा में सिगरेट के धुएं और खून की गंध मिली हुई थी।
पृथ्वी सोफे पर बैठा था, उसका ज़ख्मी हाथ अभी भी टेबल पर टिका था जिससे खून की बूंदें टपक कर सफ़ेद कारपेट को लाल कर रही थीं। उसकी आँखें बंद थीं, पर उसके दिमाग में एक ही विज़ुअल लूप पर चल रहा था—आरुषि का हाथ रियांशी की कमर पर।
सक्षम भागता हुआ अंदर आया, उसके हाथ में फर्स्ट एड किट थी। "भाई! तू पागल हो गया है क्या? यह क्या हाल बना रखा है अपना?”
पृथ्वी, "सक्षम... तूने देखा उसे? She touched her. उस आरुषि ने रियांशी को छुआ, जैसे रियांशी उसकी जागीर हो।"
सक्षम, "भाई, शांत हो जा! वो उसकी बेस्ट फ्रेंड है। बचपन से साथ हैं वो दोनों। इसमें इतना 'Over-react' करने वाली क्या बात है? हाथ ही तो रखा था।"
पृथ्वी ने झटके से अपना हाथ खींचा और सक्षम की गर्दन दबोच कर उसे दीवार से सटा दिया। उसकी आवाज़ किसी गहरी गुफा से आती हुई गूँज जैसी थी।
पृथ्वी, "तुझे समझ क्यों नहीं आता? रियांशी मेरी दुश्मन है और जो मेरा दुश्मन है, उस पर हक़ भी सिर्फ मेरा है! उसकी एक-एक सांस, उसकी नफरत, उसका गुस्सा सब मेरा है। कोई और उसे छूने की हिम्मत कैसे कर सकता है?”
सक्षम ने अपने गले को छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा,"भाई, तू होश में है? तू जिसे 'दुश्मनी' कह रहा है, वो दुनिया को 'पागलपन' दिख रहा है। और ये किस तरह की दुश्मनी है। भाई तू एक बार फिर से सोच तू ओवर रिएक्ट कर रह है।
सक्षम गला छुड़ाते हुए, हकलाकर ,"भाई... तू... तू सच में सनकी हो गया है। तुझे प्यार नहीं हुआ है, तुझे 'Obsession' हो गया है। तू उसे प्रोटेक्ट नहीं कर रहा, तू उसे अपनी प्रॉपर्टी समझ रहा है।"
पृथ्वी,”दीवार पर मुक्का मारते हुए,"Property? नहीं सक्षम वो मेरी 'जरूरत' बन गई है। जब वो आरुषि उसे छू रही थी, मेरा जी कर रहा था कि उस हाथ को ही शरीर से अलग कर दूँ। My blood was boiling, man! तुझे पता है मुझे यह ज़ख्म दर्द नहीं दे रहा मुझे वो अहसास दर्द दे रहा है कि कोई और उसके इतने करीब कैसे जा सकता है जिसे मैं अब तक हासिल नहीं कर पाया।”
पृथ्वी के एक बार फिर से मुक्का मारने से पृथ्वी का जख्मी हाथ और जख्मी हो गया। सक्षम को अब समझ आ गया था कि पृथ्वी जिसे बार बार दुश्मनी का नाम दे रहा है वह दुश्मनी तो नहीं है उससे कई ज्यादा है जिसका अंदाजा पृथ्वी को नहीं था।
सक्षम ने बात संभालते हुए कहा, "हाँ, तू एकदम सही कह रहा है पृथ्वी। तेरी दुश्मन है, तो ज़ाहिर है कि उस पर पूरा कंट्रोल भी तेरा ही होना चाहिए। लेकिन भाई, अगर तू खुद को इस तरह ज़ख्मी करता रहेगा, तो उसे झुकाएगा कैसे? तुझे अपना हाथ ठीक करना होगा ताकि तू उसकी कलाई थाम सके।”
सक्षम की बातों को सुन कर पृथ्वी ने बेहद डार्कली अपने हाथो के ज़ख्म को देखा और एक हल्की सी हंसी की आवाज आई।
पृथ्वी ने अपने हाथ को देखा और गहरी आवाज में कहा,” पट्टी अब जिसके वजह से ये जख्म आया है वही पट्टी करेगी,” इतना कह के पृथ्वी ने अपनी बाइक key ली और चला गया सक्षम को कुछ कहने का मौका भी नहीं मिला।


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